| |
 |
 |
|
 |
 |
न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है. कंपनी एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत सितम्बर 1987 पंजीकृत की गई जिसका उद्देश्य भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत योजनाओं और कार्यक्रमों के अनुसार परमाणु बिजली घरों के संचालन और बिजली के उत्पादन के लिए परमाणु बिजली परियोजनाओं को लागू करना होता है। |
|
 |
| एनपीसीआईएल परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों के डिजाइन, निर्माण, कमीशन और प्रचालन के लिए उत्तरदायी है। एनपीसीआईएल एक समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर करने वाली कंपनी होने के साथ-साथ, लाभ कर और लाभांश का भुगतान करने वाली उच्चतम स्तर की क्रेडिट रेटिंग वाली (क्रिसिल और केयर द्वारा एएए रेटिंग) कंपनी भी है। एनपीसीआईएल वर्तमान में 20 परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों का प्रचालन कर रहा है जिनकी स्थापित क्षमता 4780 मेगावाट की है। रिएक्टर बेड़े में दो क्वयित जल रिएक्टर्स (BWRs) और अठारह दाबित भारी पानी रिएक्टर्स (PHWRs) शामिल हैं और जिसमें कि परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के स्वामित्व वाला RAPS-1 (100 मेगावाट) शामिल हैं। वर्तमान में इसके अंतर्गत निर्माण के विभिन्न चरणों में चार रिएक्टर हैं जिनकी कुल क्षमता 3400 मेगावाट है तथा 1400 मेगावाट (Rapp-7 और 8) है जिनकी कि काँक्रीट की पहली ढ़लाई को 2011 के मध्य तक निर्माण के लिए तैयार किया जा रहा है। |
 |
| अक्टूबर, 2009 में सरकार द्वारा "सैद्धांतिक रूप" से अनुमोदन प्राप्त स्थलों पर तीव्र रूप से, परियोजना पूर्व गतिविधियाँ आरम्भ की गई हैं ताकि इन स्थलों पर परियोजनाओं को शीघ्र लाँच किया जा सके। एनपीसीआईएल ने अपनी इकाइयों जैसे तापबिघ-3 व 4 एवं केजीएस-3 को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय स्तर से मेल खाते, समय के अनुसार पूरा किया। |
|
 |
| |
 |
कंपनी का मिशन है 'परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी का विकास करना और देश में बिजली की बढ़ती हुई जरूरतों को पूरा करने के लिए विद्युत ऊर्जा के संरक्षित, पर्यावरणीय हितैषी एवं आर्थिक रूप से व्यवहार्य स्रोत के रूप में परमाणु विद्युत का उत्पादन करना'।
|
|
|
 |
 |
 |
प्रचालनरत् इकाइयां एवं निर्माणाधीन इकाइयां |
 |
|
 |
प्रचालनरत् परमाणु ऊर्जा इकाइयां ये हैं: तारापुर परमाणु बिजली घर इकाई -1 व 2 (2x160 मेगावाट BWRs), तारापुर परमाणु बिजली घर इकाई-3 व 4 (2x540 मेगावाट PHWRs) राजस्थान परमाणु बिजलीघर इकाई 1 से 6 (100 मेगावाट, 200 मेगावाट और 4X220 मेगावाट PHWRs) मद्रास परमाणु बिजली घर इकाई -1 व 2 (2x220 मेगावाट PHWRs), नरोरा परमाणु बिजली घर इकाई-1 व 2 (2x220मेगावाट PHWRs), काकरापार परमाणु बिजली घर इकाई-1 व 2 (2x220 मेगावाट PHWRs) और कैगा विद्युत उत्पादन केंद्र इकाई 1 से 4 (4x220 मेगावाट PHWRs)। निर्माणाधीन इकाइयां ये हैं: कुडनकुलम परमाणु विद्युत परियोजना इकाई-1 व 2 (2x1000 मेगावाट PWRs) और काकरापार परमाणु विद्युत परियोजना इकाई 3 व 4(2x700 मेगावाट PHWRs)। राजस्थान परमाणु विद्युत परियोजना इकाई-7 व 8 (2x700 मेगावाट PHWRs) में कंक्रीट की पहली ढ़लाई का कार्य 2011 के मध्य में होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, कुडनकुलम स्थल पर एनपीसीआईएल एक 10 मेगावाट के विंड फार्म का संचालन भी कर रहा है।
|  |
 |
|
|
 |
| अभी तक का उच्चतम परमाणु विद्युत उत्पादन 26473 मिलियन यूनिट, वर्ष 2010-11 में हाँसिल किया गया, जो कि पिछले वित्त वर्ष 2009-10 की तुलना में 41% अधिक हुआ। वर्ष 2010-11 तक मद्रास परमाणु बिजली घर की इकाई – 2 तथा तारापुर परमाणु बिजली घर की इकाई – 2 द्वारा एक वर्ष से अधिक का अनवरत प्रचालन दर्ज कर एनपीसीआईएल ने बिना अवरोध रिएक्टरों के सतत प्रचालन की अपनी यात्रा जारी रखी। इस तरह अब तक आठ रिएक्टरों ने एक वर्ष से अधिक निरंतर प्रचालन दर्ज किया है। एनपीसीआईएल ने लगातार कई वर्षों से रिएक्टरों का समग्र उपलब्धता गुणांक 80% से अधिक बनाये रखा है और वर्ष 2009-10 में तो यह 92% तक पहुँचा। |
|
 |
|
|
 |
| एनपीसीआईएल ने परमाणु ऊर्जा संयंत्र के संरक्षित प्रचालन का 337 से अधिक रिएक्टर वर्ष का अनुभव हासिल किया है। एनपीसीआईएल अपने उद्देश्य 'संरक्षा पहले और उत्पादन तदुपरांत' के साथ संयंत्र प्रचालन करता है। पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) और व्यावसायिक स्वास्थ्य और संरक्षा प्रबंधन प्रणाली (OHSMS) को क्रमश: आईएसओ-14001:2004 और IS-18001:2007 के अनुसार सभी स्टेशनों पर बरकरार रखा जाता है। ALARA (यथा सम्भव न्यून प्राप्य) के सिद्धांत के अनुकुल एवं परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (NPPs) में संरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए, विभिन्न NPPs में कंपनी के कर्मचारियों का व्यावसायिक उदभासन नियामक, परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद (एईआरबी) द्वारा निर्दिष्ट मानकों से काफी कम रखा जाता है। NPPs से रेडियोधर्मी बहि:स्राव का पर्यावरणीय विसर्जन काफी कम रखा जाता है (औसतन एईआरबी द्वारा निर्दिष्ट सीमा से 1% से कम)। एनपीसीआईएल ने विश्व परमाणु प्रचालक संघ (WANO), Candu ओनर्स समूह (सी ओ जी), अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में अपनी सक्रिय भागीदारी के माध्यम से विश्व स्तर पर परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की संरक्षा एवं विश्वसनीयता को बढ़ाने में योगदान दिया है। एनपीसीआईएल की इकाइयों ने विभिन्न राष्ट्रीय एजेंसियों से कई सुरक्षा पुरस्कार एईआरबी, NSCI, गुजरात सुरक्षा परिषद, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद मुंबई और DGFASLI जैसे प्राप्त किए हैं। |
|
 |
|
|
 |
| एनपीसीआईएल ने विनियामक और सांविधिक आवश्यकताओं को पूरा करते रहने के अतिरिक्त पर्यावरण प्रबन्धन (ESP) कार्यक्रम भी स्वेच्छा से आरंभ किया है। कार्यक्रम जैव विविधता, भारतीय परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के अपवर्जन क्षेत्र (EZs) में और उसके चारों ओर, विशेष रूप से नभचरों के वैज्ञानिक अध्ययन,संरक्षण और निवास स्थान के सुधार के लिये करते हैं जिसके लिए उन्हें बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) का सहयोग प्राप्त है। एनपीसीआईएल ने भारतीय परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के भीतर और उसके चारों ओर पाए जाने वाले पक्षियों के बारे में एक कॉफी टेबल पुस्तक "हमारे नभचर अतिथि" भी प्रकाशित की है। |
 |
|
|
|
 |
| |
 |
| परमाणु ऊर्जा विभाग के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की मुख्य रूपरेखाओं के अनुरूप ही योजना प्रस्ताव बनाए गए हैं। क्षमता वृद्धि के लिए नई योजनाएं अंतरराष्ट्रीय सहयोग का लाभ ले रही है, जिन पर भी विचार किया गया है। ग्यारहवीं योजना के प्रस्ताव में 2660 मेगावाट क्षमता की वृध्दि का प्रस्ताव है जिसमें कि चल रही परियोजनाओं को पूरा करना और 8 इकाइयों में स्वदेशी 700 मेगावाट दा.था.पा.रि. और 10 इकाइयों में 1000 मेगावाट सा.प.रि. के आयात के विकल्प के साथ निर्माण कार्य का प्रस्ताव है। सरकार ने सैद्धांतिक रूप से पांच नए, हरियाणा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल राज्यों में हरित क्षेत्र स्थलों के लिए अनुमोदन दे दिया है। विभिन्न परियोजना-पूर्व की गतिविधियां इन स्थलों पर और कुडनकुलम और जैतापुर स्थलों पर मिशन के तौर पर चल रही हैं। कंपनी ने इस विकास का समर्थन करने के लिए स्वदेशी क्षमता विकसित करने की आवश्यकता को मान्यता दी है और अग्रणी उद्योग भागीदारों द्वारा प्रमुख घटकों के विनिर्माण की सुविधाएं स्थापित करने हेतु पहल की है। भारत के साथ परमाणु व्यापार की संभावना खुलने से दुनिया भर के कई आपूर्तिकर्ताओं को एनपीसीआईएल की यात्रा के लिए प्रोत्साहित किया है ताकि वे खोजपूर्ण विचार विमर्श कर सकें। विभिन्न समझौता ज्ञापन और संयुक्त उपक्रम के लिए देश में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के क्रियान्वयन को सुविधाजनक बनाने पर हस्ताक्षर किए गए।
विविधीकरण के क्षेत्र में, कुडनकुलम विंड फार्म क्षमता को बढ़ाने के लिए कार्रवाई की जार ही है। एनपीसीआईएल शिखर मांगों की आपूर्ति के लिए हाइडल में निवेश लिए भी अवसरों की तलाश में है। पम्प भंडारण योजना को दो संभावित स्थलों पर स्थापित करने के लिए टिहरी हाइड्रो इलेक्ट्रिक डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही मालशेज घाट एवं हुम्बार्ली में प्रस्तावित स्थलों के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। |
|
|
 |
| |
 |
कंपनी की अधिकृत शेयर पूंजी रुपये 15,000 करोड़ है, जिसमें से Rs. 10,174.3327 करोड़ 30 सितंबर 2011 तक पूरी तरह भारत सरकार द्वारा भुगतान किया गया था। 31 मार्च, 2011 तक कुल परिसंपत्ति के रूप में रुपये Rs. 41894 करोड़ और रिजर्व अधिशेष के रूप में Rs. 13893 करोड़ था। वित्तीय वर्ष 2010-11 के लिए कुल आय Rs. 6897 करोड़, कर के उपरान्त लाभ Rs. 1376 करोड़, राजस्व प्राप्ति 98.92 और भुगतान लाभांश कुल लाभ का 30% था। औसत टैरिफ Rs. 2.49 प्रति यूनिट था। कंपनी के वित्तीय कार्य निष्पादन के लिए: |
 |
| |
|
 |
|
|
|
|
|
| |
|