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अभियंताओं व वैज्ञानिकों के लिए कॅरियर बनाने के सुअवसर
 
भारत द्वारा फ्रांस, रूस व अन्य मित्र देशों के साथ क्रमश: समझौतों पर हस्ताक्षर होने के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय असैनिक परमाणु सहयोग का एक युग आरम्भ हुआ जिससे कि भारत के शांतिपूर्ण उद्देश्यों हेतु होने वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को प्रोत्साहन मिला है, साथ ही मिली परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की स्वीकृति। हमारे देश में बिजली की माँग और आपूर्ति के बीच बहुत बडा अंतर है । आगामी कुछ समय में परमाणु ऊर्जा के उत्पादन में तेजी से बढोतरी होने की आशा की जा रही है - ऐसा एकीकृत ऊर्जा नीति (जोकि अपने त्रिचरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम द्वारा हमारे देश के लिए दीर्घ-अवधि हेतु ऊर्जा सुरक्षा निर्धारित करती है) द्वारा भी स्थापित किया गया है। इन्हीं हाल के कारणों से, प्रतिभाशाली अभियंताओं (बीई/बीटेक/ एमई/एमटेक) व डॉक्टरेट्स (परमाणु विज्ञान व इंजीनियरिंग सम्बंधी क्षेत्रों में पीएचडी) को अभूतपूर्व अवसर प्राप्त हुए हैं, जिससे कि वे अपने कॅरियर की आकांक्षाओं को उच्चतम शिखर तक पहुँचा सकते हैं।

यदि पिछले समय में उज्ज्वल अभियांत्रिकि व्यावसायिकों के लिए आई. टी. पार्क एक लक्ष्य हुआ करता था तो उसी प्रकार आगामी समय में परमाणु पार्क वही प्रगती का अवसर प्रदान करेगा। भविष्य में भारत में सभी परमाणु रिएक्टर इन्हीं परमाणु पार्कों में स्थापित किए जाएंगे। ऐसा ही एक पहला रिएक्टर महाराष्ट्र में जैतापुर में स्थापित होने जा रहा है। प्रत्येक परमाणु पार्क में आठ से दस परमाणु रिएक्टर स्थापित किए जाएंगे, सभी एक ही प्रकार के व एक ही क्षमता के होंगे, जो कि अलग-अलग चरणों मे स्थापित किए जाएंगे। बिजली की बढ़ती हुई माँग की आपूर्ति हेतु, क्षमता बढाने वाले कार्यक्रम के अन्तर्गत, सरकार द्वारा हाल ही में लिए गये ठोस कदमों से परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आरम्भ हो चुका है। एनपीसीआईएल ने ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में 10 LWRs (लाईट वाटर रिएक्टरों), प्रत्येक 1000 मेगावाट / या बड़ी क्षमता वालों पर कार्य आरम्भ करने का प्रस्ताव किया है। ये जोंकि अन्य 700 MWe क्षमता वाले 8 नये परमाणु रिएक्टरों के, जिनकी कुल क्षमता 5600 MWe है, के अतिरिक्त हैं। इन चल रही परियोजनाओं और प्रस्तावित नये रिएक्टरों के पूरा होने के साथ, परमाणु ऊर्जा की स्थापित क्षमता लगभग 10,000 मेगावाट हो जाएगी।

इस प्रकार परमाणु उर्जा के विकास के लिए पूर्ण रूप से उपयुक्त वातावरण बन चुका है। सम्भवत: यह एक दुर्लभ व्यवसाय क्षेत्र है जिसने कि अपने लक्ष्य को कई गुना ऊपर उठाया है। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन ने तो एनपीसीआईएल को और भी आकर्षक कार्यस्थल बना दिया है जहाँकि मुआवज़ा, लाभ व कई सुविधाएँ मिला कर कुल राशी किसी भी अन्य श्रेष्ठतम कम्पनी के समान ही है। इस कम्पनी की इन्जीनियरिंग प्रतिभाओं को आकर्षित करने की परम्परा ही रही है और आंकडे भी बताते हैं कि यहाँ औसतन कॅरियर अवधि इसी प्रकार के अन्य उद्योगों के मुकाबले बहुत अधिक लम्बी है।

तीन लक्ष्यों वाले इस मॉडल को चलाने के लिए, जिसमें कि पारम्परिक व्यवसाय, अंतर्राष्ट्रीय सहयोगवाले उपक्रम एवं पनबिजली व अक्षय ऊर्जा के क्षेत्रों मे विकास शामिल है, एनपीसीआईएल प्रतिभाशाली युवा अभियंताओं व डॉक्टरों को इस ऊर्जा उत्पादन की क्रांति का सक्रिय हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करती है। विकास व सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए महत्वाकांक्षी उम्मीदवारों के लिए यहां कई प्रकार के कॅरियर के रास्ते खुले हुए हैं। एनपीसीआईएल विश्व की कुछ ही गुनी- चुनी परमाणु उपयोगिताओं में से एक है जो कि अपनी योग्यता व क्षमता के आधार पर एक ही स्थान पर विभिन्न गतिविधियाँ चला सकती है। इनमें स्थल चयन, डिज़ाइन, प्रापण, निर्माण, परियोजना प्रबंधन, संविदा एवं सामग्री प्रबंधन, गुणवत्ता आश्वासन, कमीशनिंग, प्रचालन और रख-रखाव शामिल हैं।
 
भारत एवं विदेशों मे प्रौद्योगिक पावरहाउस के रूप में पहचाने जाने के कारण, कम्पनी निम्न सुविधाएँ प्रदान करती है:
  • अंतरराष्ट्रीय वातावरण में कार्य करने के अवसर
  • मेरिट के आधार पर पदोन्नति नीति
  • उच्च स्तरीय जीवन की गारंटी हेतु क्षतिपूर्ति एवं लाभ
  • विभिन्न भूमिकाओं में कार्य करने के अवसर
  • खुला एवं अनुप्रणित कार्य वातावरण
  • उत्कृष्ट जीवन-कार्य संतुलन
  • कर्मचारी व उसके परिवार के लिए व्यापक व विस्तृत चिकित्सा बीमा योजना
  • प्रगति व विकास के लिए अद्वितीय अवसर, जो केवल कार्यनिष्पादन के आधार पर ही निर्धारित किए जाते हैं ।
  • कार्य करने का स्थान चुनने के व्यापक विकल्प
  • मानवीय मूल्यों और नैतिकता की गहनता
 
एनपीसीआईएल के विकास की कहानी लिखने के लिए इच्छुक उम्मीदवारों से अनुरोध है कि वे समाचार पत्रों व मिडीया में अवसरों हेतु समय-समय पर होने वाली घोषणाओं के प्रति सतर्क रहें।
 
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